
सिद्धार्थ नगर।
घोसियारी। शिक्षा के जिन मंदिरों में सुनहरे भविष्य की नींव रखी जाती है।शासन ने नौनिहाल को बेहतर सुविधाएं देने का कार्य कर रही है। जबकि हकीकत यह हैं कि छात्र-छात्राओं के लिए फर्नीचर तक उपलब्ध नहीं है। बेंच के अभाव में अभी भी नैनिहाल फर्श पर बैठकर ठिठुरने पर मजबूर हैं।
सरकार की मंशा है, कि परिषदीय विद्यालय कान्वेंट विद्यालयों को टक्कर देते नजर आएं। परिषदीय विद्यालयों को मिशन कायाकल्प के तहत सजाया जाए और वहां भौतिक संसाधन उपलब्ध हो। बच्चों की छात्र संख्या और उपस्थिति दुरुस्त हो। समय से सभी छात्रों को ड्रेस बैग जूता मौजा उपलब्ध हो सके, लेकिन भीषण ठंड में बच्चे फर्श पर बैठकर शिक्षण कार्य करते हुए मिले। जो सरकार की मंशा पर पानी फेरने जैसा है। मिशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों पर कोई कार्य नहीं करवाया गया है। परिषदीय विद्यालयों में सबसे प्रमुख प्राथमिकता बच्चों के बैठने के लिए बेंच लगवाने की थी। जो आज के पड़ताल में अधूरी मिली।
केस नंबर एक
खेसरहा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय रिउना में छात्र फर्श पर बैठकर पढ़ते हुए मिले। विद्यालय में कुल छात्र संख्या 36 है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक अध्याराम वर्मा ने बताया कि जो भी संसाधन उपलब्ध हैं उसी से शिक्षण कार्य करवाया जा रहा है।
केस नंबर दो
प्राथमिक विद्यालय पड़री में कुल 22 छात्र है। विद्यालय में छात्र फर्श पर बैठकर पढ़ते हुए मिले विद्यालय पर प्रधानाध्यापक अनूप गौतम बच्चों को पढ़ाते मिले, उन्होंने बताया कि फर्नीचर की व्यवस्था नहीं होने से बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ाई करते है।
केस नंबर तीन
प्राथमिक विद्यालय छितौनी विद्यालय में कुल 77 छात्र-छात्रा पंजीकृत है। विद्यालय पर सभी बच्चे फर्श पर पढ़ते मिले। पूछने पर पता चला कि स्कूल में बेंच नहीं होने से छात्रों को फर्श पर टाट पर बैठाकर पढ़ाया जाता है।
केस नंबर चार
प्राथमिक विद्यालय बुढ़ी घोसियारी में कुल 86 छात्र हैं, बच्चे कमरे व विद्यालय के बरामदे में फर्श पर बैठकर पढ़ते हुए मिले। जबकि कई बच्चे ठंड के कारण ठिठुरते मिले।
जूनियर विद्यालयों में फर्नीचर की व्यवस्था है। प्राथमिक विद्यालयों में फर्नीचर की व्यवस्था स्थानीय मद से करना है। कुछ विद्यालयों में व्यवस्था कर दी गई है। जबकि कुछ के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
– देवेंद्र कुमार पांडेय, बीएसए







